इलाज की जमीन पर बिछा खतरे का जाल

  सिविल सप्लाई के स्टोर के साथ खुले में फेंकीं इस्तेमाल कीं दवाइयां और बायोमेडिकल वेस्ट इस्तेमाल सिरिंज, कैनुअला, एनएस की खाली बोतलें, सर्जरी...

इलाज की जमीन पर बिछा खतरे का जाल

इलाज की जमीन पर बिछा खतरे का जाल

 

सिविल सप्लाई के स्टोर के साथ खुले में फेंकीं इस्तेमाल कीं दवाइयां और बायोमेडिकल वेस्ट
इस्तेमाल सिरिंज, कैनुअला, एनएस की खाली बोतलें, सर्जरी ग्लब्ज से बीमारियां फैलने का डर

चंबा। बायोमेडिकल वेस्ट के निष्पादन को लेकर मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर से लापरवाही देखने को मिली है। अस्पताल में मरीजों के इलाज में इस्तेमाल दवाइयों और अन्य उपकरणों का बायोमेडिकल वेस्ट सिविल सप्लाई के स्टोर के साथ खुले में फेंका गया है।
इस्तेमाल सिरिंज, कैनुअला, एनएस की खाली बोतलें और सर्जरी ग्लब्ज वहां पड़े हैं जबकि अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश हैं कि बायोमेडिकल वेस्ट खुले में न फेंका जाए। इससे बीमारी फैलने का खतरा भी हो सकता है।

हैरानी इस बात की है कि अस्पताल भवन के अंदर यह लापरवाही बरती जा रही है और उसे रोकने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आ रहा। बुधवार को सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने बायोमेडिकल वेस्ट और सीवरेज की बह रही गंदगी की वीडियो बनाकर वायरल कर दी। इससे यह लापरवाही उजागर हुई।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक विभाग को बायोमेडिकल वेस्ट की नियमित जांच करने की जिम्मेदारी है लेकिन धर्मशाला से कभी कभार ही यह अधिकारी चंबा पहुंचते हैं। यही वजह है कि सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों में इस प्रकार की लापरवाही अकसर सामने आ ही जाती है। यदि अस्पतालों में इसकी नियमित जांच हो तो ऐसी लापरवाही बंद हो सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक अधिकारी अजय वर्मा ने बताया कि उन्हें जैसे ही इसकी भनक लगी तो उन्होंने तुरंत एमएस को फोन पर इसकी जानकारी ली। तब उन्होंने बताया कि बायोमेडिकल वेस्ट को हटा दिया गया है। वह जल्द ही मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने के लिए चंबा आएंगे।

कुछ वर्ष पहले मेडिकल कॉलेज भवन के पास एक्सपायर खांसी की दवाइयों का जखीरा मिला था। इसे निष्पादित करने के बजाय काले लिफाफे में बांधकर भवन की पिछली तरफ फेंक दिया गया था। यह दवाई कोविड के दौरान मरीजों की इलाज के लिए चंबा आई थी। इसी तरह भगोत में पिछले वर्ष बायोमेडिकल वेस्ट लोगों के खेतों में देखने को मिला।