गोवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की उठाई मांग

गो सम्मान आहवान अभियान के तहत गो वंश को राष्ट्रमाता राष्ट्र आराध्या का संवैधानिक दर्जा प्रदान करने की मांग को लेकर गो सेवकों ने महंत यतेंद्र गिरि की अ...

गोवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की उठाई मांग

गोवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की उठाई मांग

गो सम्मान आहवान अभियान के तहत गो वंश को राष्ट्रमाता राष्ट्र आराध्या का संवैधानिक दर्जा प्रदान करने की मांग को लेकर गो सेवकों ने महंत यतेंद्र गिरि की अगुवाई में एसडीएम प्रियाुंश खाती के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किए। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय गोवंश देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक चेतना का मूल आधार है वह अब संवैधानिक संरक्षण की प्रतीक्षा कर रहा है। मार्च 2026 में ब्रज क्षेत्र के पावन प्रवास के दौरान, वृंदावन के वात्सल्य ग्राम में संतों के सानिध्य में किया गया गोपूजन संपूर्ण राष्ट्र के लिए प्रेरणा का केंद्र बना है, लेकिन भूख, दुर्घटना, तस्करी और क्रूर वध के कारण आज गोवर्धन का प्रभाव क्षीण हो रहा है और हमारे पवित्र देशी गोवंश की संख्या निरंतर घट रही है।

यह अत्यंत विचारणीय विषय है कि भारतीय कृषि और ग्रामीण जीवन का प्राण कहा जाने वाला देशी गोवंश आज भी सडकों और खेतों में अत्यंत कष्टप्रद स्थितियों में है। संविधान के अनुच्छेद 48 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) के अंतर्गत यह स्पष्ट निर्देशित है कि राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा, लेकिन एक समान केंद्रीय नीति के अभाव में आज भी एक अपरिहार्य आवश्यकता बनी हुई है। देश के कुछ उच्च न्यायालयों में उत्तराखंड एवं इलाहाबाद ने अपने एतिहासिक निर्णयों में गोवंश को विधिक व्यक्ति के रूप में मान्यता देने और इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। भारतीय गोवंश को राष्ट्र आराध्या राष्ट्रमाता के रूप में आधिकारिक संवैधानिक मान्यता प्रदान की जाए। इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना गो आधारित प्राकृतिक कृषि के बिना अधूरी है। रासायनिक खाद से दूषित होती भूमि और किसानों की बढती लागत का एकमात्र स्थायी समाधान गोवंश आधारित अर्थव्यवस्था है इसे शीघ्र लागू किया जाए।