जब जिंदगी सांसों की मोहताज बन जाए और हर तरफ अंधेरा छाने लगे, तब अपनों का एक अटूट विश्वास और समाज की नेकी किसी रोशनी की किरण से कम नहीं होती। ऐसा ही एक...
हिमाचल: बड़ी बहन ने किडनी देकर छोटी को दी नई जिंदगी, 12 घंटे के ऑप्रेशन ने लिखी रिश्तों की नई इबारत
जब जिंदगी सांसों की मोहताज बन जाए और हर तरफ अंधेरा छाने लगे, तब अपनों का एक अटूट विश्वास और समाज की नेकी किसी रोशनी की किरण से कम नहीं होती। ऐसा ही एक मार्मिक मामला हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के दुर्गम क्षेत्र चुराह के गांव लटरूंड, डाकघर गनेड से सामने आया है, जहां एक बड़ी बहन ने अपनी छोटी बहन को किडनी दान कर नया जीवन प्रदान किया है।
लटरूंड गांव की 28 वर्षीय ललिता कुमारी दोनों किडनियां फेल होने के कारण मौत से जंग लड़ रही थीं। उनके लिए 35 वर्षीय बड़ी बहन राधा किसी फरिश्ते से कम साबित नहीं हुईं। डॉक्टरों ने जब किडनी ट्रांसप्लांट को ही बचने का एकमात्र रास्ता बताया, तो बड़ी बहन राधा ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी एक किडनी छोटी बहन को दान करने का साहसिक फैसला लिया।
कागजी औपचारिकताओं और लंबी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के आठ महीने के लंबे इंतजार के बाद, बीते सोमवार को टांडा मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट का यह जटिल ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों की विशेष टीम के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी। बिना रुके लगातार 12 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
वर्तमान में दोनों बहनें, डोनर राधा और रिसीवर ललिता, पूरी तरह से स्वस्थ हैं और डॉक्टरों की निगरानी में रिकवर कर रही हैं। यह ऑपरेशन न केवल चिकित्सा विज्ञान की सफलता का प्रतीक है, बल्कि बहन के अटूट प्रेम और त्याग की भी एक मिसाल है।
ललिता के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार अपनी सारी जमापूंजी पहले ही इलाज पर खर्च कर चुका था और महंगे ट्रांसप्लांट का खर्च उठाना उनके लिए असंभव था। ऐसे में, पंजाब केसरी समाचार पत्र ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद समाज के विभिन्न वर्गों से मदद मिली और ऑपरेशन संभव हो पाया।
यह घटना दर्शाती है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी मानवीय संवेदनाएं और पारिवारिक रिश्ते जीवन को एक नई दिशा दे सकते हैं। राधा का यह निस्वार्थ कार्य कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।