एक महीना एंग्जायटी में रही, विश्व कप से बाहर कर दिया था, पूरे टूर्नामेंट में बेहद रोई हूं

जेमिमाह रॉड्रिग्स ने कहा कि मुश्किल महीने के बाद मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचना ‘एक सपने जैसा’...

एक महीना एंग्जायटी में रही, विश्व कप से बाहर कर दिया था, पूरे टूर्नामेंट में बेहद रोई हूं

एक महीना एंग्जायटी में रही, विश्व कप से बाहर कर दिया था, पूरे टूर्नामेंट में बेहद रोई हूं

जेमिमाह रॉड्रिग्स ने कहा कि मुश्किल महीने के बाद मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचना ‘एक सपने जैसा’

भारतीय महिला टीम की धाकड़ बल्लेबाज जेमिमाह रॉड्रिग्स ने कहा कि मुश्किल महीने के बाद मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराकर महिला विश्व कप के फाइनल में पहुंचना ‘एक सपने जैसा’ लगा। ऑस्ट्रेलिया को गुरुवार रात सेमीफाइनल में हराने के बाद भावुक रॉड्रिग्स ने कहा कि यह मेरे 50 या 100 रन की बात नहीं थी, आज बस भारत को जिताना था। मुझे पता था कि मुझे कुछ अवसर मिले, लेकिन मुझे लगा कि भगवान ने सब कुछ लिखा हुआ था। मैं मानती हूं कि अगर आप सही इरादे से सही काम करते हैं, तो वो हमेशा आशीर्वाद देते हैं। मुझे लगता है जो कुछ भी हुआ, वह बस इसी पल के लिए निर्धारित था। यह महीना बहुत कठिन था। यह सब एक सपना जैसा लगता है और अब तक विश्वास नहीं हो रहा। भारतीय महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर एकदिवसीय इतिहास में सबसे बड़ा लक्ष्य 339 रन सफलतापूर्वक हासिल किया है।

मैच शुरू होने से पांच मिनट पहले मुझे बताया गया कि मेरी बल्लेबाजी पोजीशन नंबर तीन है 

शेफाली वर्मा के आउट होने के बाद रॉड्रिग्स तीसरे नंबर पर दूसरे ओवर में बल्लेबाजी शुरू की और अंत तक 127 रन पर नाबाद रहीं। रॉड्रिग्स ने कहा कि मुझे लगा था कि मैं नंबर पांच पर जाऊंगी। मैं नहा रही थी और तभी टीम की मीटिंग चल रही थी। मैंने कहा बता देना। मैच शुरू होने से पांच मिनट पहले मुझे बताया गया कि मैं नंबर तीन पर जाऊंगी। मैंने अपने बारे में नहीं सोचा। यह मेरे लिए स्वयं को साबित करने का अवसर नहीं था, बल्कि भारत को जीत दिलाने का था, क्योंकि कई बार अहम मौकों पर हम हार चुके हैं। मैंने सोचा कि मुझे आखिर तक डटे रहना है और टीम को जीत दिलानी है। उन्होंने कहा कि पिछली बार (2022 में) मुझे विश्व कप से बाहर कर दिया गया था।

नवी मुंबई मेरे लिए हमेशा रही खास इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता

इस बार मैंने सोचा कि बस कोशिश करूंगी, लेकिन चीज़ें लगातार बिगड़ती चली गईं और मेरे हाथ में कुछ नहीं था। सौभाग्य से मेरे आसपास कुछ अद्भुत लोग थे, जिन्होंने मुझ पर विश्वास रखा। मैं इस पूरे दौरे में लगभग हर दिन रोई हूं। मानसिक रूप से बहुत मुश्किल दौर था, बेहद चिंतित रहती थी। टीम से बाहर होना भी एक और झटका था। मैं बस मैदान पर उपस्थित रहना चाहती थी। शेष सब भगवान ने संभाल लिया। उन्होंने कहा कि जब हैरी दी (हरमनप्रीत) आईं, हमने बस यही कहा कि एक लंबी साझेदारी चाहिए। रन अपने आप आएंगे। बाद में जब दीप्ति आईं तो उन्होंने मुझे लगातार बातों से मोटिवेट किया। ऋचा आईं तो उन्होंने माहौल हल्का रखा। मैं बहुत धन्य हूं कि जब मैं स्वयं नहीं संभल पाती, तो मेरे साथी मुझे आगे बढ़ाते हैं। मैं इसका श्रेय अकेले नहीं ले सकती। यह मुश्किल था, लेकिन मैंने प्रयास किया कि आखिरी गेंद तक शांत रहूं। जैसे ही स्क्रीन पर देखा ‘भारत पांच विकेट से जीता’ मैं स्वयं को रोक नहीं पाई। नवी मुंबई मेरे लिए हमेशा खास रहा है और इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता था। मैं हर उस दर्शक को धन्यवाद देना चाहती हूं, जिसने हमें तब भी चियर किया जब हम मुश्किल में थे।