जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान मेडिकल कॉलेज चंबा में रेबीज का इंजेक्शन तक नहीं है। नतीजतन, मेडिकल कालेज में कुत्तों के काटने या अन्य जंगली जानवरो...
जिले के सबसे बड़े अस्पताल में नहीं रेबीज का इंजेक्शन
जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान मेडिकल कॉलेज चंबा में रेबीज का इंजेक्शन तक नहीं है। नतीजतन, मेडिकल कालेज में कुत्तों के काटने या अन्य जंगली जानवरों के काटने पर इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को बाजार से 400 रुपये खर्च कर इंजेक्शन खरीद कर लाने पड़ रहे हैं। इससे लोगों की जेब पर कैंची चल रही है। मेडिकल कॉलेज चंबा में रेबीज के इंजेक्शन तक न होना विभागीय लचर व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। वहीं, विभागीय अधिकारी स्टेट पोर्टल पर मई में दो बार रेबीज इंजेक्शन के आर्डर देने की बात कहते हुए अपना पक्ष रख रहे हैं। नतीजतन, लोगों को अब रेबीज का इंजेक्शन भी महंगा साबित हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज चंबा में उपचार करवाने के लिए भरमौर-पांगी, भटियात, चुराह, डलहौजी और भटियात से लोग पहुंचते हैं। बावजूद इसके मेडिकल कॉलेज चंबा में दिन प्रतिदिन व्यवस्थाएं पटरी से उतरती जा रही हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण अब इतने बड़े संस्थान में रेबीज का इंजेक्शन न होने से मिलता है। स्वास्थ्य संस्थानों में रेबीज के इंजेक्शन निशुल्क लगाने की व्यवस्था है। बावजूद इसके अभी तक रेबीज का इंजेक्शन तक मुहैया न होना अपनेआप में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था को दर्शाता है।
चंबा शहर के सपड़ी, जनसाली, करियां, मुगला, रजेरा, सुल्तानपुर, हरदासपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कुत्तों के झुंडों से खतरा लगातार बना रहता है। 2025 में जिला मुख्यालय चंबा के बाजार में पागल कुत्तों ने एक ही दिन में स्कूली बच्चों और महिलाओं सहित 20 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया था। शहर में कुछ हफ्तों के भीतर ही कुत्तों के काटे जाने के 40 से 42 मामले मेडिकल कॉलेज चंबा में पहुंच चुके हैं। औसतन हर दिन कुत्ते के काटने से पीड़ित 4 से 6 लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। बावजूद इसके इतने बड़े मेडिकल कॉलेज चंबा में रेबीज का इंजेक्शन न होना चिंता का विषय है।
मेडिकल कॉलेज चंबा के प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि सेंटर पोर्टल पर मई में दो बार रेबीज के इंजेक्शन के लिए ऑर्डर जारी किए गए हैं। जल्द रेबीज के इंजेक्शन पहुंचने की उम्मीद है।