चंबा के हिंदूवादी संगठनों ने एडीसी को मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन चंबा शहर के विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने ऐतिहासिक लक्ष्मी नाथ मंदिर परिसर के सुचारू...
लक्ष्मीनाथ मंदिर प्रबंधन समिति का फिर करो गठन
चंबा के हिंदूवादी संगठनों ने एडीसी को मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
चंबा शहर के विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने ऐतिहासिक लक्ष्मी नाथ मंदिर परिसर के सुचारू संचालन और व्यवस्था को लेकर प्रबंधन समिति को तत्काल पुन: गठित और बहाल करने की मांग उठाई है। उन्होंने इस आशय की मांग को लेकर मंगलवार को एडीसी अमित मैहरा को ज्ञापन भी सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल की अगवाई सनातन धर्म सभा चंबा के प्रधान सुरेश कश्मीरी ने की। उन्होंन कहा कि यह मंदिर हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्थाएं और पूर्त विन्यास अधिनियम के तहत आता है, जिसके पदेन अध्यक्ष स्वयं जिला उपायुक्त हैं। इसके बावजूद पिछले कई वर्षों से मंदिर की आधिकारिक प्रबंधन समिति स्थगित और निष्क्रिय पडी हुई है। इस कारण मंदिर का पूरा संचालन केवल नौकरशाही के हाथों में सिमट कर रह गया है। समिति के न होने से स्थानीय जनता का प्रतिनिधित्व, मंदिर का नियमित आडिट और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता पूरी तरह से ठप्प हो चुकी है।
उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रशासनिक शून्यता और समिति के पुनर्गठन को लेकर पूर्व में भी कई आवेदन और स्मरण-पत्र सौंपे गए थे, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एक वैध और कार्यात्मक समिति की अनुपस्थिति के कारण ऐतिहासिक मंदिर परिसर के रख-रखाव, वित्तीय व्यवस्था और देव-संपत्ति के प्रबंधन में भारी अव्यवस्था उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए आवेदकों ने प्रशासन को चेतावनी भरा अल्टीमेटम दिया है कि वे आगामी पंद्रह दिनों के भीतर समिति के पुनर्गठन की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से शुरू करें।
उन्होंने साथ ही विशेष मांग रखी है कि समिति में शामिल किए जाने वाले गैर-सरकारी सदस्यों का चयन केवल धार्मिक गतिविधियों, निस्वार्थ सेवा या सनातनी परंपराओं से जुड़े हुए योग्य व्यक्तियों में से ही किया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि राजनीतिक सिफारिश, राजनैतिक प्रभाव या विशुद्ध राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को इस पवित्र मंदिर समिति से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए। संस्थाओं ने कडा रुख अपनाते हुए प्रशासन को सचेत किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उचित कदम नहीं उठाए गए तो वे प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और मंदिर की गरिमा की रक्षा के लिए माननीय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय शिमला में एक जनहित याचिका दायर करने के लिए बाध्य होंगे। प्रतिनिधिमंडल में ब्राहमण प्रतिनिधि सभा के प्रधान अजितेश शर्मा, नरेश महाजन, डा. राजेश सहगल, धर्मवीर वैद व सत्याप्रसाद वैद आदि मौजूद रहे।