अंतिम दिन ढोल-नगाड़ों की थाप पर सूही मढ़ से पालकी में पिंक पैलेस लाए गए माता के चिह्न शोभायात्रा से भक्तिमय हुआ माहौल, सूही मेले के समापन पर मुख्या...
पारंपरिक घुरेई गायन के साथ सूही मेले का समापन
अंतिम दिन ढोल-नगाड़ों की थाप पर सूही मढ़ से पालकी में पिंक पैलेस लाए गए माता के चिह्न
शोभायात्रा से भक्तिमय हुआ माहौल, सूही मेले के समापन पर मुख्यातिथि थे विस अध्यक्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला स्तरीय तीन दिवसीय सूही मेले का सोमवार को समापन हो गया। रानी सुनयना की स्मृति में आयोजित इस मेले के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं लेकिन दिलों में अगले वर्ष फिर मिलने की आस भी संजोए हुए थे।
समापन पर विधानसभा अध्यक्ष मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ स्थानीय प्रशासन और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। पूरे आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक विधानों का विशेष ध्यान रखा गया। भरमौर से आईं गद्दी समुदाय की महिलाओं ने पारंपरिक घुरेई गीत गाते हुए रानी सुनयना के बलिदान की गाथा प्रस्तुत की। उनके सुरों में समाई पीड़ा और श्रद्धा ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। साथ ही सूही मढ़ में आयोजित भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। दिनभर मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति में डूबा नजर आया।
मेले के अंतिम चरण में सूही मढ़ से माता के पवित्र चिह्न को पालकी में उठाकर पिंक पैलेस तक लाया गया। बैंड-बाजा, ढोल-नगाड़ों के बीच निकली शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सैकड़ों श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।
मेले के दौरान राजनौण समेत आस-पास सजी खाने-पीने और खिलौनों की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई मेले के रंग में रंगा नजर आया और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना रहा। मेले के समापन पर श्रद्धालुओं ने रानी सुनयना को नम आंखों से विदाई दी और अगले वर्ष फिर मिलने का वादा किया।