हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने ग्रेच्युटी भुगतान मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के तहत अपील...
चंबा ग्रेच्युटी केस;हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अपील की अधिकतम सीमा 120 दिन तय
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने ग्रेच्युटी भुगतान मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट के तहत अपील दायर करने की अधिकतम समय सीमा 120 दिन ही है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता कर्म चंद बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता कर्म चंद ने 10 अप्रैल 2019 को जिला श्रम अधिकारी, चंबा के समक्ष अपना ग्रेच्युटी दावा प्रस्तुत किया था। श्रम प्राधिकारी ने 31 जनवरी 2020 को याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय देते हुए 49,846 रुपये की ग्रेच्युटी राशि तथा 10 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ वन मंडलाधिकारी चंबा ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील दायर न करते हुए लगभग 376 दिन की देरी से उप श्रम आयुक्त-सह-अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दाखिल की। हालांकि अपीलीय प्राधिकारी ने 29 जुलाई 2025 को अपील को खारिज कर दिया, लेकिन इस दौरान ब्याज दर को 10 प्रतिशत से घटाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने अपीलीय प्राधिकारी के इस संशोधन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 7(7) के अनुसार अपील दायर करने की वैधानिक अवधि 60 दिन है, जिसे पर्याप्त कारण होने पर अधिकतम 60 दिन और बढ़ाया जा सकता है। इस प्रकार कुल अधिकतम अवधि 120 दिन ही होती है। चूंकि अपील 376 दिन की देरी से दायर की गई थी। अदालत ने कहा कि समय सीमा समाप्त होने के बाद दायर अपील पर अपीलीय प्राधिकारी को आदेश में किसी प्रकार का परिवर्तन करने का अधिकार नहीं था। अदालत ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए 29 जुलाई 2025 के अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया और जिला श्रम अधिकारी के मूल आदेश को बहाल रखा। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि देने के निर्देश प्रभावी हो गए।
जिला श्रम अधिकारी चंबा अनुराग शर्मा ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार वन मंडलाधिकारी को वर्ष 2020 के आदेशानुसार 10 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय श्रम कानूनों की मूल भावना को मजबूत करने वाला है।