हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान अधिकारियों के कार्य में लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी व्य...
कांगड़ा में मुख्यमंत्री सुक्खू का अधिकारियों पर फूटा गुस्सा, बोले- 'काम नहीं करना तो नौकरी छोड़ दो'
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान अधिकारियों के कार्य में लेटलतीफी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। धर्मशाला के सकोह में इनडोर आइस स्केटिंग रिंक और रोलर स्केटिंग रिंक के निर्माण में हो रही देरी को लेकर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अधिकारी ठीक से काम नहीं कर सकते तो उन्हें नौकरी छोड़ देनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सहायक अभियंता, अधिशाषी अभियंता और प्रोजेक्ट डायरेक्टर से सवाल किया कि पिछले वर्ष टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद परियोजना के काम में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं आई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा, "काम करना है ढंग से, नहीं करना तो नौकरी छोड़ दो...अगर ऐसी स्पीड से काम करना है तो सस्पेंड कर दूंगा।" मुख्यमंत्री का अधिकारियों को फटकार लगाते हुए यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो गया है।
यह घटना उस समय हुई जब मुख्यमंत्री 33.78 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इनडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक की आधारशिला रखने पहुंचे थे। कार्य की ड्राइंग और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी न होने पर मुख्यमंत्री काफी गुस्से में नजर आए। उन्होंने परियोजना में हो रही अनावश्यक देरी पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
इस दौरान पर्यटन निगम के अध्यक्ष और नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली ने भी हस्तक्षेप किया और मुख्यमंत्री के समक्ष काम में देरी का मामला उठाया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से यह संदेश साफ है कि उनकी सरकार विकास परियोजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने और जनहित के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की हिदायत दी। यह घटना राज्य में विकास कार्यों की गति और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।