एक ही हादसे में अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, यह दृश्य उस समय साफ दिखाई दिया जब घर के हॉल में एक साथ रखी पार्थिव देहों के सामने पूरा परिवा...
अपनों को विदाई देते फूटा दर्द... हर आंख रोई
एक ही हादसे में अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, यह दृश्य उस समय साफ दिखाई दिया जब घर के हॉल में एक साथ रखी पार्थिव देहों के सामने पूरा परिवार और गांव बिलख उठा।
माहौल इतना गमगीन था कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक अपने आंसू नहीं रोक पाए। हर तरफ चीख-पुकार, सिसकियां और अपनों को पुकारती आवाजें सुनाई दे रही थीं। घर के बड़े हॉल में जब सभी पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए रखी गईं तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। परिजन कभी पार्थिव देहों को निहारते तो कभी एक-दूसरे के गले लगकर फूट-फूटकर रोते। मातम में डूबे घर का हर कोना दर्द और बिछड़ने की टीस बयां कर रहा था।
सबसे भावुक क्षण तब आया जब चाचा और भतीजा वाहन के जरिये घर पहुंचे। दोनों आईटीबीपी में हैं और गुवाहाटी और झारखंड में सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें देखते ही परिजनों का दर्द एक बार फिर फूट पड़ा। महिलाओं की चीखें और बच्चों की सिसकियां सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। कई परिजन बेसुध होकर जमीन पर बैठ गए जबकि कुछ अपनों को पुकारते हुए बिलखते रहे।
दुख की इस घड़ी में गांव और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोग परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे रहे। बेसुध हो रहीं महिलाओं और रोते बच्चों को संभालने के लिए महिलाएं लगातार उनके साथ रहीं। पुरुष भी परिजनों को हिम्मत देने का प्रयास करते नजर आए। माहौल ऐसा था कि किसी के पास सांत्वना के लिए शब्द नहीं थे। घर के आंगन से लेकर आसपास की गलियों तक शोक का माहौल पसरा रहा। पार्थिव देहों को अंतिम संस्कार के लिए जब घर के दरवाजे से बाहर निकाला। महिलाएं, बेटियां, बेटे अपनों को खोने को लेकर रोती-बिलखती बाहर निकलीं। घर की महिलाएं गश खाकर गिर पड़ीं। इन्हें अन्य महिलाओं ने सहारा देकर संभाला।