जनजातीय उपमंडल में कुपोषित बच्चों और कमजोर माताओं की सेहत सुधारने के नाम पर एक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। घाटी में बांटी जा रही पोषण बार किट के...
एक्सपायरी डेट छिपाकर मासूमों को परोस दी पुरानी पोषण किट
जनजातीय उपमंडल में कुपोषित बच्चों और कमजोर माताओं की सेहत सुधारने के नाम पर एक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
घाटी में बांटी जा रही पोषण बार किट के पैकेटों पर पुराने विवरण के ऊपर नए स्टीकर चिपका कर निर्माण और एक्सपायरी तिथि के साथ बैच नंबर तक बदल दिए गए। इस अनियमितता से पूरे महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
घाटी के आंगनबाड़ी केंद्रों में बांटे गए एक ही उत्पाद के दो अलग-अलग पैकेट मिले हैं। मूल पैकेट पर निर्माण तिथि अगस्त 2025 और उपयोग की अंतिम तिथि मई 2026 दर्ज थी (जो समाप्त हो चुकी है) लेकिन इसके ऊपर चालाकी से चिपकाए गए नए स्टीकर पर निर्माण तिथि मार्च 2026 और एक्सपायरी दिसंबर 2026 दर्ज कर दी गई जबकि बैच नंबर बदलकर पीएम 10242 कर दिया गया।
दूरदराज के केंद्रों से किट वापस मंगवाने में छूटे पसीने
मामला उजागर होते ही विभाग पांगी के 66 आंगनबाड़ी केंद्रों से संदिग्ध सामग्री का ब्योरा जुटाने में लग गया है। घाटी के दुर्गम इलाकों में मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण विभागीय कर्मचारियों को शनिवार को विशेष बसों और पैदल रास्तों से विभिन्न केंद्रों पर भेजा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित हो चुकी सभी किटों को तुरंत वापस लेकर डंप किया जा रहा है। इन्हें बाद में नियमानुसार संबंधित कंपनी को वापस लौटाया जाएगा।
जांच और अधिकारियों के बयान
घाटी के आंगनबाड़ी केंद्रों से ब्योरा जुटाया जा रहा है। कुलाल और कुठार केंद्रों से मिले 10 से 12 सैंपलों की जांच में करीब 30 फीसदी सामग्री संदेहास्पद पाई गई है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत सामग्री के एक्सपायर होने की आशंका है। पूरी जांच रिपोर्ट उपायुक्त और डीपीओ चंबा को भेजी जा रही है। इसके आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी। - राजेंद्र चौहान, कार्यवाहक सीडीपीओ एवं तहसीलदार पांगी