बोले- ब्रेक फेल होते ही खाई की ओर लुढ़की बस, पैदल चलेंगे, लेकिन खटारा बसों में नहीं बैठेंगे चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, यात्री बोले- न करें सवा...
बस पीछे जा रही थी, मौत सामने खड़ी थी, लगा अब कोई नहीं बचेगा
बोले- ब्रेक फेल होते ही खाई की ओर लुढ़की बस, पैदल चलेंगे, लेकिन खटारा बसों में नहीं बैठेंगे
चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा, यात्री बोले- न करें सवारियों की जिंदगी से खिलवाड़
बस पीछे की तरफ भाग रही थी, लगा अब कोई नहीं बचेगा, बच्चे रो रहे थे, यात्री भगवान से सुरक्षित रखने की दुआ मांग रहे थे। बस में सवार यात्रियों के ये शब्द उस खौफनाक पल की गूंज हैं जब 50 जिंदगियां मौत के बिल्कुल सामने खड़ी थीं। ब्रेक फेल होते ही बस खाई की ओर लुढ़की। हर चेहरा आखिरी उम्मीद तलाश रहा था। इसी बीच चालक ने सूझबूझ दिखाकर बस को पहाड़ी से टकराकर मौत की रफ्तार थाम दी। हादसा टल गया लेकिन इसके बाद उठे सवाल और गुस्सा अब और भारी है। लोग पूछ रहे हैं कि कब तक खटारा बसों में सफर करेंगे। जिंदगी की कोई कीमत नहीं। खटारा बसों में जाने से अच्छा है पैदल ही सफर कर लें।
जिले में एक बार फिर बड़ा हादसा होने से टल गया। चालक ने समझदारी से एचआरटीसी बस में सवार 50 से अधिक यात्रियों का जीवन बचा लिया। बस को चालक पहाड़ी से नहीं टकराता तो बड़ा हादसा हो सकता था। यह घटना चंबा-गागला-धुलाड़ा रूट पर हुई। एचआरटीसी बस दोपहर करीब 3:15 बजे चंबा बस स्टैंड से रवाना हुई थी। शुक्रवार शाम को 4 बजे बणेई मंदिर के पास अचानक बस के ब्रेक फेल हो गए। अनियंत्रित होकर बस पीछे गहरी खाई की ओर बढ़ने लगी। बस में सवार यात्री घबरा गए। बस को खाई की ओर जाते देख महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग चीखने लगे। उनके चेहरों पर खौफ था। इस दौरान चालक ने सूझबूझ दिखाकर बस को पीछे पहाड़ी से टकरा दिया। जोरदार टक्कर के साथ बस रुक गई। इससे बड़ा हादसा टल गया। हादसे में चार यात्रियों को हल्की चोटें आईं। सभी को तुरंत मेडिकल कॉलेज चंबा पहुंचाया गया। यहां उनका उपचार चल रहा है।
बस पीछे की तरफ तेजी से जा रही थी। हमें लगा अब कोई नहीं बचेगा। ड्राइवर ने बस पहाड़ से टकराकर हमारी जान बचाई। कब तक चालक सवारियों की जान बचाएगा। हर बार हादसा टला है। - सुरेश सिंह
बच्चे रो रहे थे, लोग भगवान को याद रहे थे। यह पल जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव था। चालक अगर बस को पहाड़ी से नहीं टकराता तो बस गहरी खाई में गिर जाती। - शुभम कुमार
हादसे के बाद डीडीएम को फोन किया। उन्होंने फोन नहीं उठाया। अगर उस वक्त कोई बड़ा हादसा हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता। अगर आज नई बसें नहीं भेजीं तो धरना-प्रदर्शन करेंगे। - नरेश कुमार
अगर बसें खराब हैं तो रूट पर भेज कर सवारियों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ न करें। इससे अच्छा पैदल चले जाएंगे। खटारा बसों में सफर नहीं करेंगे। अब लापरवाही नहीं सहेंगे। - नवीन कुमार, यात्री
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मामला ध्यान में लाया गया है। फिलहाल नई बसें नहीं हैं। बस की सही से मरम्मत करके रूट पर भेजा जाएगा। नई बसें आएगी तो ही रूट पर भेज पाएंगे। - शुगल सिंह, डीडीएम, एचआरटीसी
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पहले भी हुआ था ऐसा
- 27 अप्रैल 2026 (नाडू) : अगाहर से चंबा आ रही एचआरटीसी बस के ब्रेक फेल होने से 45 से अधिक यात्री बाल-बाल बचे थे। चालक ने बस को मिट्टी के ढेर से टकराकर रोका था।
- साल 2022 में भी अगाहर-जुमहार-लुड्डू-चंबा रूट बस के ब्रेक फेल हो चुके हैं। उस दौरान भी चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए चामुंडा मंदिर के समीप सड़क के किनारे पेड़ से बस को टकराकर हादसा टाला था।
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इन रूटों पर खराब हो चुकी हैं बसें
चंबा- बाट, चंबा- चंबा- अगाहर, उटीप, चंबा- जम्मुहार, चंबा- शिमला, चंबा- चुवाड़ी, चंबा- पठानकोट, चंबा- भड़ेला, डलहौजी- चकोत्तर, चंबा- किहार, चंबा- देहरादून, चंबा- कीड़ी, चंबा- पनेला, चंबा- दिल्ली, चंबा- पुखरी, डलहौजी- मंगलेरा रूटों पर बसें खराब हो चुकी है। कुल मिला कर जिला के करीब-करीब हरेक मार्ग पर एचआरटीसी की बस बीच राह हांफने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
--इतनी बसें दे रहीं सेवाएं
चंबा डिपो में कुल 100 बसें हैं। 200 रूट हैं। इनमें 10 बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। 90 बसें सेवाएं दे रही हैं। ये लंबे रूटों से लौटकर लोकल रूटों पर भी दौड़ती हैं।
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चंबा डिपो की बसों की हालत में सुधार किया जा रहा है। मरम्मत के लिए 10 बसें विभिन्न डिपुओं में भेजी गई हैं। मरम्मत के बाद इस बसों को जल्द भेजा जाएगा। इलेक्टि्रक बसें का स्टॉक आने में देरी हुई है। बसों की कमी दूर करने के लिए चंबा डिपो को इलेक्टि्रक बसें उपलब्ध करवाई जाएंगी। - अजय वर्मा, उपाध्यक्ष, एचआरटीसी