जिले में दवा बेचने वाले सभी निजी स्टोर बंद रहे। इसके चलते अस्पताल के दवा स्टोरों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहीं। मरीजों को अपने इलाज के लिए दवाई ल...
दवा मिली नहीं, इंतजार और कतारों में ही बीत गया दिन
जिले में दवा बेचने वाले सभी निजी स्टोर बंद रहे। इसके चलते अस्पताल के दवा स्टोरों में मरीजों की लंबी लाइनें लगी रहीं। मरीजों को अपने इलाज के लिए दवाई लेने में काफी परेशानी हुई।
मेडिकल कॉलेज में संचालित सिविल सप्लाई के दवा स्टोर और सरकारी दवा डिस्पेंसरी में सुबह से लेकर शाम तक मरीजों की लंबी लाइनें लगी रही। ओपीडी में चिकित्सीय जांच करवाने के बाद जैसे ही मरीज निजी दवा स्टोर के पास गए तो वहां उन्हें शटर बंद मिले। इसके बाद मरीज दवाई लेने के लिए डिस्पेंसरी में गए। वहां घंटों लाइन में खड़े होने के बाद सभी दवाइयां नहीं मिल पाईं। इसके चलते उन्हें सारी दवाई लेने के लिए फिर से सिविल सप्लाई के स्टोर में घंटों लाइन में खड़े होना पड़ा। मरीजों का पूरा दिन दवाई जुटाने में ही निकल गया। जिले में 300 से अधिक दवा स्टोर हैं। ये हड़ताल के चलते बंद रहे। ऐसे में मरीज दवाई लेने के लिए मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी और सिविल सप्लाई के स्टोर पर निर्भर रहे। दवाई लेने के लिए मरीजों की आपस में धक्का-मुक्की चलती रही। यदि यह हड़ताल आगे भी जारी रही तो मरीजों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। धरवाला से मेडिकल कॉलेज बीमारी का इलाज करवाने पहुंचे परस राम ने बताया कि पहले उन्हें ओपीडभ् में चिकित्सीय जांच को लेकर धक्के खाने पड़े। उसके बाद दवाई लेने के लिए खूब पसीने छूटे। कोटी निवासी नरेंद्र कुमार ने बताया कि वह पत्नी का इलाज करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे। वहां उन्हें दवाई लेने के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ा। हरदासपुरा के मयंक कुमार ने बताया कि ऐसी हड़ताल आगामी दिनों में जारी रही तो मरीजों का अपना इलाज करवाना मुश्किल हो जाएगा।ऑनलाइन दवाओं की बिक्री बंद करने की उठा रहे मांग
केमिस्ट सरकार से मांग कर रहे हैं कि ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री बंद होनी चाहिए। एआई से जाली पर्ची बनाकर ऑनलाइन दवाई खरीदी बेची जा रही है। इसके अलावा केमिस्ट नकली दवाओं की बिक्री रोकने की मांग भी कर रहे हैं। केमिस्टों में अमृत पाल, राकेश कुमार, संजय, सुनील, इरशाद ने बताया कि यह सिर्फ एक सांकेतिक हड़ताल थी, यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो आने वाले दिनों में हड़ताल का दायरा बढ़ाया जाएगा।