हमीरपुर पॉलीटेक्नीक धोखाधड़ी मामला: उच्च स्तरीय जांच समिति गठित, छात्र सर्वेश की हालत स्थिर

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित राजकीय पॉलीटेक्नीक कॉलेज में कथित रक्षा मंत्रालय के नाम पर हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया...

हमीरपुर पॉलीटेक्नीक धोखाधड़ी मामला: उच्च स्तरीय जांच समिति गठित, छात्र सर्वेश की हालत स्थिर

हमीरपुर पॉलीटेक्नीक धोखाधड़ी मामला: उच्च स्तरीय जांच समिति गठित, छात्र सर्वेश की हालत स्थिर

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित राजकीय पॉलीटेक्नीक कॉलेज में कथित रक्षा मंत्रालय के नाम पर हुए ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। इस मामले में तकनीकी शिक्षा विभाग ने ज्वाइंट डायरैक्टर टैक्नीकल एजुकेशन (सुंदरनगर) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह समिति जल्द ही हमीरपुर पॉलीटेक्नीक परिसर का दौरा कर विभिन्न पहलुओं पर आंतरिक जांच शुरू करेगी।

यह पूरा मामला कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र सर्वेश शर्मा से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर भारतीय सेना के लिए ड्रोन बनाने के प्रोजेक्ट 'रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने का दावा किया गया था। सितंबर 2026 में यह खबर मीडिया में खूब छाई रही और छात्र को राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया था।

हालांकि, अक्टूबर 2026 में इस दावे की सच्चाई पर सवाल उठने लगे जब रक्षा नवाचार संगठन (DIO) ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उनके रिकॉर्ड में सर्वेश शर्मा या उससे जुड़े किसी भी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट स्वीकृत नहीं की गई है। इस खुलासे के बाद 28 अक्टूबर को छात्र सर्वेश शर्मा अपने हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

सर्वेश को तुरंत हमीरपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया। अस्पताल के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, सर्वेश की हालत अब स्थिर बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम द्वारा उसके आवश्यक ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं।

कॉलेज के प्रिंसिपल की शिकायत पर हमीरपुर सदर पुलिस थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस इस साइबर धोखाधड़ी के मामले की गहनता से जांच कर रही है, जिसमें कथित ग्रांट से संबंधित दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक पत्राचार और डिजिटल उपकरणों की जांच शामिल है।

जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या सर्वेश खुद इस धोखाधड़ी का शिकार हुआ था या इस मामले में कोई अन्य तथ्य सामने आएंगे। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति भी संस्थान के निगरानी तंत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी कि इतने लंबे समय तक चल रहे इस घटनाक्रम की भनक प्रबंधन को समय रहते क्यों नहीं लगी।

ताज़ा खबरें

अधिक देखी जाने वाली खबरें