टीवी पर बेटी का स्वर्णिम दांव देखते ही छलक पड़े माता-पिता के आंसू

चंपा ठाकुर की जीत पर घर में गूंजे भारत माता के जयकारे, युगांडा को 35-15 से हराकर भारतीय टीम बनी चैंपियन सुबह से फाइनल का इंतजार कर रहा था परिवार, हर...

टीवी पर बेटी का स्वर्णिम दांव देखते ही छलक पड़े माता-पिता के आंसू

टीवी पर बेटी का स्वर्णिम दांव देखते ही छलक पड़े माता-पिता के आंसू

चंपा ठाकुर की जीत पर घर में गूंजे भारत माता के जयकारे, युगांडा को 35-15 से हराकर भारतीय टीम बनी चैंपियन
सुबह से फाइनल का इंतजार कर रहा था परिवार, हर अंक के साथ बढ़ता रहा रोमांच

चंबा। बेटी देश के लिए खेले और उसके हाथों में स्वर्ण पदक आए, इससे बड़ा गर्व किसी माता-पिता के लिए क्या होगा। शनिवार को यह सपना चंपा ठाकुर ने साकार किया तो चुराह स्थित उनके घर में खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
अहमदाबाद में आयोजित पहली कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप के फाइनल में भारतीय महिला टीम की जीत के साथ ही परिवार के सदस्यों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। घर में भारत माता के जयकारे गूंजने लगे।

चंपा का फाइनल मुकाबला देखने के लिए परिवार सुबह से ही उत्सुक था। माता नारो ठाकुर ने घर के जरूरी काम निपटाए और टीवी के सामने बैठने की तैयारी कर ली। पिता रमेश पहलवान भी शाम करीब छह बजे अपना काम छोड़कर टीवी के सामने पहुंच गए। भतीजे गोरा पहलवान भी इस खास पल के गवाह बनने के लिए उनके साथ मौजूद रहे। सभी की निगाहें स्क्रीन पर थीं और इंतजार था बेटी के देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का। शाम करीब साढ़े सात बजे मुकाबला शुरू हुआ तो घर में हर अंक के साथ रोमांच बढ़ता गया। भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर परिजन उत्साहित होते रहे। चंपा के खेल ने उनकी उम्मीदों को और मजबूत किया। आखिरकार भारतीय महिला टीम ने युगांडा को 35-15 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। जीत की घोषणा होते ही परिवार खुशी से झूम उठा।

परिजनों के लिए यह उपलब्धि केवल एक पदक की खुशी नहीं, बल्कि चंपा के वर्षों के अभ्यास और संघर्ष का सम्मान भी है। मिट्टी के मैदान से शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है। बेटी की इस कामयाबी से पिता रमेश पहलवान और माता नारो ठाकुर का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। चंपा की उपलब्धि से चुराह सहित पूरे चंबा जिले में खुशी का माहौल है।

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