बोंखरी मोड़ स्थित एक निजी होटल प्रबंधन ने पेश किया फर्जी रिकाॅर्ड, श्रम विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला श्रम अधिकारी ने लिया कड़ा संज्ञान  जिला चम्बा के उपमंडल डल्हौजी के अंतर्गत बोंखरी मोड़ स्थित एक निजी होटल प...

बोंखरी मोड़ स्थित एक निजी होटल प्रबंधन ने पेश किया फर्जी रिकाॅर्ड, श्रम विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

बोंखरी मोड़ स्थित एक निजी होटल प्रबंधन ने पेश किया फर्जी रिकाॅर्ड, श्रम विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला श्रम अधिकारी ने लिया कड़ा संज्ञान 

जिला चम्बा के उपमंडल डल्हौजी के अंतर्गत बोंखरी मोड़ स्थित एक निजी होटल प्रबंधन वेतन भुगतान में हेराफेरी और सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ के मामले में बुरी तरह घिर गया है। होटल प्रबंधन पर कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर करने और वेतन मांगने पर धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला श्रम अधिकारी ने कड़ा संज्ञान लिया है और प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

नवम्बर में वेतन न मिलने से शुरू हुआ विवाद

मामले की शुरुआत नवम्बर माह में हुई थी जब कर्मचारियों ने वेतन न मिलने की शिकायत श्रम विभाग में की। विभाग ने जांच के दौरान रिकॉर्ड तलब किया और 29 नवंम्बर को वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 के तहत प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर वेतन देने का आदेश दिया। लेकिन 1 दिसम्बर को शिकायतकर्ता अजय कुमार और अभय कुमार ने विभाग को बताया कि प्रबंधन ने जो रिकॉर्ड पेश किया, वह पूरी तरह फर्जी है। आरोप है कि प्रबंधन ने असली रजिस्टर छुपा लिए और एक नया रजिस्टर तैयार कर उसमें कर्मचारियों के जाली हस्ताक्षर कर दिए। यही नहीं, नए रिकॉर्ड में कर्मचारियों का वेतन भी वास्‍तविकता से कम दर्शाया गया ताकि देनदारी कम बने।

भुगतान के बजाय दी धमकियां

विभागीय आदेश के बावजूद प्रबंधन ने तय तारीख 15 दिसम्बर तक वेतन जारी नहीं किया। जब कर्मचारी 16 दिसम्बर को दोबारा पहुंचे तो प्रबंधन ने भुगतान करने के बजाय उन्हें एक हस्तलिखित पत्र थमा दिया, जिसकी भाषा अपमानजनक और धमकी भरी थी। 

जवाब नहीं मिला तो प्रबंधन के विरुद्ध हाेगी कड़ी कार्रवाई : अनुराग शर्मा 

जिला श्रम अधिकारी अनुराग शर्मा ने बताया कि होटल प्रबंधन द्वारा धोखाधड़ी, दस्तावेजों में जालसाजी और विभाग को गुमराह करने के प्रयासों को देखते हुए नोटिस जारी किया गया है। प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिनों का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।