टूटे शीशे, लटक गए दरवाजे, हर मोड़ पर खतरों को बुला रहा एचआरटीसी

 जिले की सड़कों पर दौड़ने वाली खटारा बसें हर दिन यात्रियों की परीक्षा ले रही हैं। बसों की उखड़ीं सीटें, लटकते दरवाजे और टूटे शीशे सफर को थकाऊ और...

टूटे शीशे, लटक गए दरवाजे, हर मोड़ पर खतरों को बुला रहा एचआरटीसी

टूटे शीशे, लटक गए दरवाजे, हर मोड़ पर खतरों को बुला रहा एचआरटीसी

 जिले की सड़कों पर दौड़ने वाली खटारा बसें हर दिन यात्रियों की परीक्षा ले रही हैं। बसों की उखड़ीं सीटें, लटकते दरवाजे और टूटे शीशे सफर को थकाऊ और परेशानी भरा बना रहे हैं।
विद्यार्थियों से लेकर रोजमर्रा एचआरटीसी की बसों में सफर करने वाले कर्मचारी और अन्य यात्री सफर के दौरान हर रोज इम्तिहान दे रहे हैं।
चंबा डिपो की सरकारी बसों की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। जो बसें लोगों की सुरक्षित यात्रा का जिम्मा उठाती हैं, वहीं अब खतरे का सबब बन चुकी हैं। हैरानी की बात है कि रूटों पर जाने वाली गई बसों में रूट बोर्ड तक नहीं होता है। गत्ते पर जगह का नाम लिखकर काम चलाया जा रहा है। गत्ते के बोर्ड पर लिखा जगह का नाम कई बार यात्री पढ़ भी नहीं पाते हैं। कई बसों में सीटें निकलने से यात्रियों को खड़े-खड़े ही सफर करना पड़ता है।

बसों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि ये अकसर बीच रास्ते में ही खराब हो रही हैं। इससे यात्रियों को घंटों तक सड़क पर खड़ा होकर इंतजार करना पड़ता है। बीते दिनों भी चंबा-भड़ेला और चंबा-पठानकोट रूट की बस तकनीकी खराबी आने से खराब हो गई थी। होली रूट पर जा रही बस का टायर निकल गया था। इसमें यात्री बाल-बाल बचे थे। बसों में सफाई न होने से भी यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ती है।
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चंबा डिपो की 15 बसें पांच महीने में हुईं कंडम
चंबा डिपो में करीब 150 बसें हैं। इनमें 100 बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। शेष 50 बसों में से कुछ वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी हैं तो कुछ बसें अलग-अलग रूटों पर खराब हालत में खड़ी हैं। पिछले पांच महीनों में करीब 15 बसें पूरी तरह कंडम हो चुकी हैं। कलपुर्जों की कमी के कारण बसों की मरम्मत नहीं हो रही है।
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दो महीने में इन रूटों पर थमे पहिये
बीते दो माह में करीब बीस विभिन्न रूटों पर बसें खराब हो चुकी हैं। इनमें चंबा-भड़ेला, चंबा-पठानकोट, चंबा-अगाहर, चंबा-लंगेरा, चंबा-सलूणी, चंबा-बनीखेत, चंबा-पनेला, चंबा-बाट, चंबा-देहरादून, चंबा-दिल्ली, चंबा-भरमौर, डलहौजी-चकोत्तर, चंबा-शिमला, चंबा-चुवाड़ी और चंबा-खज्जियार सहित अन्य रूट शामिल हैं।
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कितने चालकों और कितने मैकेनिकों की कमी
चंबा डिपो में वर्तमान में करीब 40 चालकों की कमी है। वर्तमान में 190 चालक हैं। 202 रूटों पर बसें दौड़ती हैं। वर्ष 2021 के बाद चालकों की भर्ती नहीं हो पाई है। करीब 20 मेकेनिकों की कमी है। वर्तमान में महज दस मेकेनिक हर दिन 40 बसों की मरम्मत करते हैं।
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कॉलेज में पढ़ती हूं, हर दिन चंबा आती हूं, और हर दिन एचआरटीसी की बस बीच रास्ते में खराब होती है। इससे काफी परेशानी होती है। घर वाले भी परेशान हो जाते है। - पायल कुमारी
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ऐसा कोई दिन नहीं जब एचआरटीसी की बसें बीच रास्ते में खराब न हों। घर सड़क से काफी दूर है। बस खराब होने पर देर रात तक घर पहुंचते हैं। बसें खटारा हो गई हैं। - मुस्कान
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मेरे घर के लिए एकमात्र सरकारी बस जाती है। यह भी कई बार बीच रास्ते में ही खराब हो जाती है। कई बार तो सरकारी बस में बैठने में भी डर लगा रहता है। - कनु कुमारी
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स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी इस समस्या से परेशान हैं। बस खराब होने से स्कूल और कॉलेज पहुंचने में देरी हो जाती है। कई बार ऐसी समस्या का सामना करना पड़ा है। - तनु कुमारी
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मामला ध्यान में है। इस बारे में कई बार सरकार को अवगत करवाया गया है। सरकार की ओर से बसें भेजी जाएंगी, तभी रूटों पर नई बसें भेज पाएंगे। इसके अलावा बसों की मरम्मत का कार्य जारी है। - शुगल सिंह, डीडीएम, एचआरटीसी

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