बंद हुआ छोर, तो कंधों ने थाम ली जिंदगी की डोर

राख-लुडेरा सड़क एक माह से यातायात के लिए बंद राख-लुडेरा सड़क बंद होने के कारण शुक्रवार को लुडेरा गांव के बीमार बुजुर्ग रतन चंद (66) को अस्पताल पहुं...

बंद हुआ छोर, तो कंधों ने थाम ली जिंदगी की डोर

बंद हुआ छोर, तो कंधों ने थाम ली जिंदगी की डोर

राख-लुडेरा सड़क एक माह से यातायात के लिए बंद

राख-लुडेरा सड़क बंद होने के कारण शुक्रवार को लुडेरा गांव के बीमार बुजुर्ग रतन चंद (66) को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन गया। इस बीच ग्रामीणों ने मिलकर पालकी को एंबुलेंस बनाया और कंधे पर उठाकर तीन किलोमीटर के उबड़-खाबड़ रास्ते से मरीज को अस्पताल पहुंचाया। जानकारी के अनुसार राख-लुडेरा सड़क एक माह से यातायात के लिए बंद है। सड़क का बंद होना लोगों की दुश्वारियां बढ़ा रहा है। शुक्रवार सुबह लुडेरा निवासी 66 साल के रतन चंद की टांग में बहुत तेज दर्द होने लगी। देखते ही देखते बुजुर्ग की हालत खराब होने लगी। इसके चलते परिजनों ने आखिरकार पालकी के जरिये ही उन्हें सड़क तक पहुंचाने का निर्णय लिया और ग्रामीणों को एकत्रित किया। इसके बाद परिजनों और गांव के युवाओं ने बारी-बारी पालकी को उठाकर तीन किलोमीटर के उबड़-खाबड़, पत्थरों से भरे रास्ते को तय कर बुजुर्ग को दूसरी सड़क तक पहुंचाया और वहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया।