जनजातीय उपमंडल भरमौर की होली तहसील में मौसम की मार के सेब की फसल को हुए नुकसान से परेशान बागबानों की दिक्कतें दोगुना हो गई है। मौसम की बेरुखी और बीमार...
मौसम की मार, सेब की फसल को नुकसान
जनजातीय उपमंडल भरमौर की होली तहसील में मौसम की मार के सेब की फसल को हुए नुकसान से परेशान बागबानों की दिक्कतें दोगुना हो गई है। मौसम की बेरुखी और बीमारी के कारण सेब की फसल पहले ही बेहद कम है, वहीं बागबानी विभाग की लापरवाही ने बागबानों की कमर तोड़ कर रख दी है। सरकारी डिपो में छिडकाव के लिए जरूरी एंटी-फंगल और कीटनाशक दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं।
बागबानों को मजबूरी में खुले बाजार से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। बागबानों की मानें तो ओलावृष्टि व असमायिक बर्फबारी ने पहले ही सेब की बंपर फसल की उम्मीदों को धरायशी कर दिया है। इसके बाद अब फसल को बीमारियों से बचाने के लिए बागबानी विभाग की ओर से कीटनाशक दवाएं नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि नेताओं के भाषणों और चुनावी घोषणापत्रों में किसानों-बागवानों के लिए स्पेशल पैकेज और करोड़ों के बजट का ढिंढोरा पीटा जाता है। मगर यह पैकेज फाइलों में दफन हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि नई बीमारियों से सेब के पौधों को कैसे बचाया जाए इसके लिए विभाग को समय-समय पर जागरूकता कैंप लगाने चाहिए थे, लेकिन आलम यह है कि धरातल पर न तो कोई सरकारी एक्सपर्ट पहुंच रहा है और न ही कोई कैंप लगाया जा रहा है। सरकारी सुविधाएं सिर्फ कागजों पर दौड़ रही हैं, जबकि आम बागवान इस संकट की घड़ी में पूरी तरह से लाचार और भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।