ककीरा में काली माता मंदिर के पास नहीं है क्रैश बैरियर का नामोनिशान मार्ग पर पहले भी हो चुके है कई हादसे, पीडब्ल्यूडी की लापरवाही पड़ी भारी बनी...
क्रैश बैरियर की कमी बनी मौत की वजह
ककीरा में काली माता मंदिर के पास नहीं है क्रैश बैरियर का नामोनिशान मार्ग पर पहले भी हो चुके है कई हादसे, पीडब्ल्यूडी की लापरवाही पड़ी भारी
बनीखेत (चंबा)। लाहड़ू-ककीरा मार्ग पर सोमवार सुबह हुआ हादसा पूरे इलाके को झकझोर गया।
गुजरात से घूमने आए दो परिवारों के पांच सदस्यों सहित एक चालक की मौत ने न केवल कई घरों की खुशियां छीन लीं, बल्कि पहाड़ की सड़कों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में चार अन्य लोग घायल हुए हैं। इनका उपचार जारी है। जिस जगह यह दुर्घटना हुई, वहां पैरापिट का नामोनिशान नहीं हैं। सड़क पर मिट्टीनुमा कीचड़ भी वाहन चालकों की परेशानियां बढ़ा रहा है। मौके पर मौजूद लोग यह कहते सुने गए कि यहां पैरापिट होते तो हादसे को रोका जा सकता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे वाला मोड़ बेहद संवेदनशील माना जाता है। बरसात में सड़क पर मिट्टी और पानी आ जाता है। इससे वाहन फिसलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद लंबे समय से इस मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी की जा रही है। हादसे के बाद क्षेत्रवासियों में प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के प्रति भारी रोष है। दुर्घटना ने तीन परिवारों को उजाड़ कर रख दिया। कुछ ही पलों में परिवार के कमाने वाले और अपनों को खोने का दर्द परिजनों पर पहाड़ बनकर टूट पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि दुर्घटना इतनी भयावह थी कि राहत और बचाव कार्य चलाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पहाड़ी और संवेदनशील सड़कों पर तत्काल प्रभाव से क्रैश बैरियर, पैरापिट और चेतावनी संकेत लगाए जाएं। हर हादसे के बाद केवल जांच और आश्वासन दिए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की जाती। ककीरा हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा से जुड़ी छोटी लापरवाही भी कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस हादसे से सबक लेकर सुरक्षा इंतजामों को कितना मजबूत करता है।